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क्या डिग्रियां सिर्फ कागज हैं? पेपर लीक और टूटते सपनों की टीस

पेपर लीक की टीस

नौजवान सालों-साल मेहनत करते हैं. फिर अचानक खबर आती है कि पेपर लीक हो गया. अक्सर ऐसा भी होता है कि पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द कर दी जाती है. परीक्षा रद्द होते ही उम्मीदवारों की सारी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिर जाता है.

"मैं अब और जीना नहीं चाहता, मेरा मन भर गया है…मेरी मौत के बाद किसी को परेशान न किया जाए… मैंने अपनी बीएससी की सारी डिग्री जला दी हैं, ऐसी पढ़ाई का क्या फायदा जो एक नौकरी ना दिला सके.."

ये जिंदगी से हताश निराश एक युवा बृजेश पाल के सुसाइड नोट की चंद लाइनें हैं, जिसने पेपर लीक की वजह से अपनी जान दे दी. सालों की मेहनत और एक झटके में कुछ लोगों के लालच की वजह से पेपर लीक, फिर परीक्षा रद्द और फिर एक लंबा इंतजार दूसरी परीक्षा का. ये सिर्फ कन्नौज के बृजेश पाल की नहीं हमारे देश के कई मजबूर बेरोजगार नौजवानों की कहानी है. ये छात्र अपने सुनहरे भविष्य का सपना देख रहे थे, रात दिन मेहनत कर परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. इनके घरवाले इस आस में थे कि उनका बेटा सरकारी नौकरी करेगा और उनकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगीं. लेकिन उनके हाथ लगा ये सुसाइड नोट…

पेपर लीक के बढ़ते मामलों ने हमारे देश में उत्तर से लेकर दक्षिण तक छात्रों के भविष्य को अंधेरे में डाल दिया है. अपने घर-परिवार से दूर ये छात्र देश के अलग-अलग शहरों में जाकर सालों तक पढ़ाई करते हैं. कई छात्रों की आर्थिक हालत ऐसी है कि उन्हें दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता फिर भी वो अपनी मंजिल पाने के लिए हर मुश्किल पार करने के लिए तैयार हैं. लेकिन ‘पेपर लीक’ न उनको मंजिल तक पहुंचने दे रहा है और न ही उनके सपनों को सच होने दे रहा है.

देश भर में फैला पेपर लीक का जाल

पेपर लीक भारत के लिए बड़ी समस्या बन गई है. इसकी वजह से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है. पिछले 7 सालों में ही देशभर में पेपर लीक के सैकड़ों मामले सामने आए हैं जिनका असर करीब दो करोड़ छात्रों पर पड़ा है. पेपर लीक के मामले सबसे ज्यादा राजस्थान से आ रहे हैं. यूपी भी पीछे नहीं है यहां फरवरी में पेपर लीक का बड़ा मामला सामने आया जिससे पूरे देश में हंगामा मच गया. उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 17-18 फरवरी को पुलिस की भर्ती परीक्षा हुई.

यूपी पुलिस के 60 हजार 244 पदों के लिए 48 लाख से ज्यादा आवेदन आए, जिनमें 16 लाख से ज्यादा लड़कियां शामिल थीं. 17 फरवरी को परीक्षा के दिन ही एक पेपर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा. हालत ऐसी थी कि परीक्षा के दिन छात्रों को 50-50 रुपये में टेलीग्राम पर पेपर दिए गए, जिसके जवाब भी बिल्कुल सही लिखे हुए थे. भारी हंगामे और विरोध के बाद 26 फरवरी को सरकार ने ये परीक्षा रद्द कर दी. हाल ही में नोएडा एसटीएफ ने यूपी पुलिस भर्ती केस के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि राजीव नाम के इस शख्स ने एक हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों तक पेपर पहुंचाया.

राजस्थान में 4 साल में 12 बार पेपर लीक

राजस्थान से भी एक के बाद एक पेपर लीक की घटना सामने आ रही हैं. राज्य में 2019 के बाद से हर साल औसतन तीन पेपर लीक हुए हैं. इससे लगभग 40 लाख छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है. एक जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों को सबूत मिले कि हर एक पेपर को लीक करने के बदले में 5 से 15 लाख रुपये तक आरोपियों को मिले हैं.

आरोप है कि राजस्थान पेपर लीक के मास्टरमाइंड भूपेंद्र सारन ने पेपर को खरीदने के लिए एक शिक्षक को 40 लाख रुपये तक का भुगतान किया था, जिसे प्रति छात्र पांच लाख रुपये में बेचा था. राज्य में 2011 से 2022 के बीच पेपर लीक के लगभग छब्बीस मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से 14 पिछले चार सालों में ही दर्ज हुए हैं. राजस्थान पेपर लीक मामले में भारत का हॉट स्टेट बना हुआ है.

एमपी में भी पेपर लीक गिरोह का भंड़ाफोड़

मध्य प्रदेश बोर्ड एग्जाम 2023 में भी पेपर लीक होने की बात स्कूली शिक्षा विभाग ने मानी थी. प्रदेश के भिंड और भोपाल में पेपर लीक को लेकर FIR दर्ज हुई थी. पेपर लीक में 3 आरोपियों को गुजरात से गिरफ़्तार किया गया था. साथ ही जिस केंद्र से पेपर लीक होने की सूचना पुलिस को अपनी जांच में मिली थी उस केंद्र के अध्यक्ष और प्रतिनिधि पर भी FIR दर्ज करके सख्त कार्रवाई की गई थी.

इसके अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार और हरियाणा में भी पेपर लीक के मामले सामने आए हैं. दक्षिण भारतीय राज्यों की बात की जाए तो कर्नाटक का पीएससी, कर्नाटक इंजीनियरिंग परीक्षा, तमिलनाडू का टीएनपीएससी, महाराष्ट्र का एचएससी और केरल का एसएसएलसी का फिजिक्स पेपर लीक मामला सुर्खियों में रहा है. वहीं हरियाणा के एचएचएससी और कश्मीर के जूनियर इंजीनियर भर्ती परिक्षा का परिणाम मुख्य रहा है. पेपर लीक के मामले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करने के साथ-साथ पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगाते हैं.

Paper Leak State Wise Data

पेपर लीक कैसे होता है?

प्रतियोगी परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच में पुलिस ने पाया कि हर राज्य में पेपर को लीक करने का अलग-अलग अंदाज था. मसलन असम में परीक्षा शुरू होने के कुछ सेकंडो़ं में पूरे पेपर को वॉट्सअप पर लीक कर हजारों परीक्षार्थियों को भेजा गया था. दूसरी ओर मध्य प्रदेश की पुलिस जांच में सामने आया कि पेपर लीक के आरोपियों ने मुंबई की उस कपंनी के सर्वर को हैक कर लिया था जिसे परीक्षा का आयोजन करने की जिम्मेदारी दी गई थी.

वहीं महाराष्ट्र में सोशल मीडिया में पेपर लीक होने पर परीक्षार्थियों ने इसकी शिकायत पुलिस में की थी. जबकी पेपर लीक के मामले में टॉप राजस्थान में पेपर की सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि सरकार के ऑफिस से चुरा कर लीक किया गया था. वहीं यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में STF को जांच में पता चला कि ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की जिस कंपनी को पेपर प्रिंट होने के बाद वेयरहाउस से ट्रांसपोर्ट करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उनकी मिलीभगत से पेपर लीक का ये सारा खेल चला था.

कई बार परीक्षा सेंटर से भी पेपर लीक कर दिया गया. पेपर लीक का खेल इस तरह खेला जाता है कि एक पेपर को 25 से 50 लाख में बेचने की डील होती है. अब एक छात्र के लिए इतना बड़ा अमाउंट देना आसान तो है नहीं, तो एक साथ कई छात्रों को जोड़ लिया जाता है और फिर यही पेपर कम कीमत में, यहां तक कि 500 रुपये में भी बिकता है.

कौन हैं ये पेपर लीक माफिया?

बीते कई सालों से पेपर लीक के खिलाफ मुहिम चलाने वाले करियर एक्सपर्ट पवन कुमार बताते हैं कि उनके पास कई ऐसे गैंग के नंबर हैं जो पेपर लीक कराते हैं. हम लोग ऐसे लोगों को ट्रैक करते रहते हैं. एसटीएफ को हमने नंबर भी दिया लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ. कोई भी परीक्षा होनी होती है तो उसके महीनों पहले से पेपर लीक करने की तैयारी शुरू हो जाती है.

मध्य प्रदेश में हुए नर्सिंग परीक्षा पेपर लीक मामले में हाई कोर्ट में केस दायर करने वाले दिलीप शर्मा ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की समस्या काफी गंभीर है. कुछ माफिया किस्म के लोग अपने निजी स्वार्थ को साधने के लिए ऐसी हरकत करते रहते हैं, जिससे योग्य परीक्षार्थियों की मेहनत पर पानी फिर जाता है. प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों के लिए काफी हद तक सरकारें भी जिम्मेदार हैं. सवाल ये है कि आरोपियों के पकड़े जाने के बाद भी वो आसानी से कैसे छूट जाते हैं जबकी कानून में तो सजा का कड़ा प्रावधान है.

क्या कहते हैं पीड़ित छात्र

नर्सिंग स्टूडेंट कुणाल कुमार का कहना है कि मैंने 2022 में नर्सिंग भर्ती की परीक्षा दी थी, दो साल हो गए लेकिन उस परीक्षा का अभी तक कुछ पता नहीं चल रहा है. सरकार को ध्यान देना चाहिए जो फर्जीवाड़ा हुआ उसे अलग कर फिर से परीक्षा लेनी चाहिए, क्योंकि पहले से नर्सिंग छात्रों के दो साल बर्बाद हो चुके हैं. वहीं ग्वालियर के छात्र संदेश कुमार का कहना है कि जहां कहीं भी परीक्षा हो रही हैं, वहां पेपर लीक हो रहे हैं. सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए. बाद में सरकार बोलती है कि हम ये कर रहे हैं, हम वो कर रहे हैं जबकी सरकार कुछ नहीं कर रही है. हम युवाओं का जीवन बर्बाद कर रही है. हम नर्सिंग छात्र हैं, पिछले दो साल से हमारा एग्जाम नहीं हुआ है.

पेपर लीक पूरे सिस्टम की विफलता

पद्मश्री सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार कहते हैं कि इससे बुरा और कोई प्रभाव छात्रों पर नहीं हो सकता है. उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है. वे अपने को असहाय समझने लगते हैं और अंत में गलत कदम उठाते हैं. पेपर लीक होना पूरे सिस्टम की नाकामी है. कुछ ग़लत लोग पूरे सिस्टम से खिलवाड़ करते हैं. सिस्टम में गलत लोगों का प्रवेश और ग़लत लोगों से संपर्क इसका प्रमुख कारण है. सिर्फ कुछ पैसे की खातिर प्रश्नपत्र लीक होते हैं.

आनंद कहते हैं पेपर लीक एक भयानक रोग है. इससे निपटने के सारे उपाय उपलब्ध हैं. भारत में नौकरियों पर युवाओं का विशेष जोर होता है. हज़ारों लाखों की संख्या में वे परीक्षा देते हैं. परिवार और समाज का सपना होता है. आज ज़रूरत है स्वरोज़गार को अपनाने की. नौकरियां कितनी भी हों सब को नहीं मिल सकती हैं. समय के साथ नौकरियों का स्वरूप भी बदला है. इसलिए खुद को और अपनी सोच को बदलने की भी ज़रूरत है.

कैसे होती है पेपरों की निगरानी

ऐसा नहीं है कि पेपर लीक रोकने के लिए सरकार के पास सिस्टम नहीं है. सरकार हर प्रतियोगी और व्यावसायिक परीक्षा में नकल रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करती है. जैसे इसमें परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना, परीक्षा केंद्र सुरक्षा दस्ते या पुलिस कर्मियों की तैनाती, उड़न दस्ते की तैनाती, परीक्षा केंद्रों पर जैमिंग उपकरण लगाना, परीक्षा की सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करना और पेपर लीक करने वालों को पकड़ने के लिए विशेष जांच दल का गठन करना शामिल होता है. पेपर बनाने वाले प्रोफेसर से लेकर प्रिंटिंग करने वालों के साथ ही पेपर को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने वाले लोग कड़ी सुरक्षा में रहते हैं, और हर एक पर 24 घंटे कड़ी नजर रखी जाती है. इसके बावजूद पेपर लीक होना कई सवाल खड़े करता है.

एक्शन में सरकार

बढ़ते पेपर लीक के मामलों के बाद केंद्र और राज्य सरकारें हरकत में आई हैं. इस अपराध को रोकने के लिए केंद्र सरकार ‘लोक परीक्षा (कदाचार रोकथाम) विधेयक-2024 लेकर आई है. फरवरी में ये विधेयक संसद के दोनों सदनों में पास हुआ, जिसमें UPSC, SSC, JEE, NEET, रेलवे, बैंकिंग, CUET समेत शैक्षणिक संस्थाओं में एडमिशन और नौकरियों में प्रवेश के लिए सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली सभी सार्वजनिक परीक्षाओं को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है.

इस विधेयक के मुताबिक सामूहिक तौर पर नकल करवाना गैरजमानती होगा. अगर कोई नकल करता पकड़ा गया तो उसे 3 साल की जेल और 10 लाख का जुर्माना भरना होगा. वहीं अगर कोई पेपर लीक में शामिल होगा तो 10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है.

Lok pariksha vidheyak

देश के अलग अलग राज्यों में पेपर लीक और नकल को लेकर बने कानूनों में सज़ा का प्रावधान मुख्य तौर पर इस प्रकार है…

Paper Leak law in states

प्रोफेसर फुरक़ान क़मर कहते हैं कि हमारे देश में ऐसी संस्थाएं भी हैं जो कई दशकों से प्रतियोगी परीक्षाएं करवाती आ रही हैं, लेकिन आजतक कभी कोई पेपर लीक नहीं हुआ है. UPSC भी ऐसी ही संस्था है जहां पेपर लीक की कोई घटना सामने नहीं आई है. UPSC जैसी संस्थाओं को रोल मॉडल बनाना चाहिए, उनसे सीखना चाहिए. वो जिस तरह से परीक्षाओं का आयोजन करते हैं बाकी जगह भी यही मॉडल होना चाहिए. पेपर लीक को रोकने में तकनीक का भी बड़ा रोल हो सकता है जिसे अपनाया जाना चाहिए.

निष्कर्ष (Conclusion)

पेपर लीक केवल एक परीक्षा की विफलता नहीं है, बल्कि यह लाखों युवाओं के विश्वास और भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कानून का सख्त होना जरूरी है, लेकिन असली समाधान तब निकलेगा जब परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को UPSC की तरह पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाया जाएगा। जब तक परीक्षा माफियाओं को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिलता रहेगा, तब तक बृजेश पाल जैसे होनहार युवाओं का सुसाइड नोट हमारे सिस्टम के लिए शर्मिंदगी का सबब बना रहेगा।

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