BPSC TRE और नियोजित शिक्षक ट्रांसफर: सीनियरिटी खोने के डर से असमंजस में शिक्षक
पटना: बिहार में शिक्षकों के अंतर-जिला और ऐच्छिक स्थानांतरण (Transfer) को लेकर एक बार फिर संशय की स्थिति पैदा हो गई है। शिक्षा मंत्री का बयान और विभाग की नियमावली में विरोधाभास के कारण शिक्षकों के बीच भ्रम का माहौल है। विशेष रूप से BPSC TRE शिक्षकों और राज्यकर्मी बन चुके नियोजित शिक्षकों (विशिष्ट शिक्षकों) को अपनी वर्षों की सीनियरिटी खोने का डर सता रहा है।
शिक्षा मंत्री का आश्वासन बनाम लिखित नियमावली
शिक्षा मंत्री ने हाल ही में कहा था कि ट्रांसफर लेने पर शिक्षकों की सीनियरिटी प्रभावित नहीं होगी। लेकिन, वर्तमान नियमों के अनुसार, ऐच्छिक स्थानांतरण लेने पर शिक्षक नए जिले की वरीयता सूची (Gradation List) में सबसे कनिष्ठ (Junior-most) हो जाते हैं। लिखित नियमावली में संशोधन के अभाव में मौखिक बयान कानूनी रूप से मान्य नहीं होते।
BPSC TRE और नियोजित शिक्षकों की चिंता
प्रशासनिक विशेषज्ञों और शिक्षक संघों के अनुसार, मामला तकनीकी रूप से काफी गंभीर है:
- BPSC TRE शिक्षक: इनका कैडर जिला स्तरीय है। जिला बदलते ही इनकी मौजूदा सीनियरिटी के शून्य होने का जोखिम बना हुआ है।
- नियोजित शिक्षक (विशिष्ट शिक्षक): सक्षमता परीक्षा पास करने वाले इन शिक्षकों की चिंता है कि एक ट्रांसफर के कारण प्रमोशन की रेस से बाहर न हो जाएं।
शिक्षक संघों की मांग
सरकार जून के अंत तक नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने की तैयारी में है। ऐसे में शिक्षक संघों ने स्पष्ट मांग की है कि:
"शिक्षा मंत्री अपने बयान को अमली जामा पहनाने के लिए विभाग से तुरंत एक स्पष्ट और लिखित गाइडलाइन जारी करवाएं ताकि शिक्षकों की वर्षों की सीनियरिटी सुरक्षित रहे।"