सुपौल जिले के कोशी तटबंध के भीतर शिक्षा व्यवस्था की दयनीय स्थिति ने एक बार फिर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किशनपुर प्रखंड के बौराहा पंचायत की यह कहानी न केवल शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का उदाहरण है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ की गंभीर स्थिति को भी उजागर करती है।
सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड क्षेत्र में सोमवार को पत्रकार सरोज कुमार बौराहा पंचायत के प्राथमिक विद्यालय मानिकपुर समय 11 बजकर 05 मिनट में पहुंचे जहां एक शिक्षिका किरण कुमारी 15 विद्यार्थी के साथ बैठ पढ़ा रही थी। पूछने पर बताई कि मेरे विद्यालय में कुल तीन शिक्षक हैं जिसमें एक स्कूल प्रधान और एक सहायक शिक्षक अनुपस्थित है। जब कुल नामांकित बच्चे के बारे में पूछा गया तो शिक्षिका ने बताई की यह मुझे जानकारी नहीं है दूरभाष के माध्यम से स्कूल प्रधान से ही पूछ लिया जाय। मध्याहन भोजन की भी कोई व्यवस्था नहीं देखा गया।
11 बजकर 20 मिनट में प्राथमिक विद्यालय गोढ़ियारी पहुंचे जहां 98 नामांकित बच्चे में 50 उपस्थित पाए । कुल चार शिक्षक में तीन उपस्थित पाया। पठन-पाठन की प्रक्रिया चल रही थी।
12 बजे प्राथमिक विद्यालय बुढ़ियाडीह पहुंचे जहां एक आंगनबाड़ी सेविका अपने बच्चे को लेकर पढ़ा रही थी पूछने बाबत सेविका बताई कि मेरा केंद्र संख्या 179 है जो इसी विद्यालय में शिप्ट किया गया है। कुछ देर बाद स्कूल प्रधान अर्जून झा रमते झूमते अपने स्कूल पहुंचे पूछने बाबत बताया कि नाव ही अभी आया है तो हम क्या कर सकते हैं। कुल 53 नामांकित बच्चे में 08 बच्चे उपस्थित पाए । कुल चार शिक्षक में दो स्कूल प्रधान उपस्थित पाए अन्य दो शिक्षिका के बारे में बताई कि आज दोनों छुट्टी में है। वहीं पहुंचे कुछ ग्रामीणों ने स्कूल प्रधान के विरुद्ध आक्रोश जताते हुए कहा कि स्कूल हमेशा बंद पड़ा रहता है स्कूल में कभी भी विद्यार्थी के लिए खाना नहीं पकता है। हमलोग नदी से पश्चिम हैं बच्चे को पढ़ने की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकारी विद्यालय है भी तो शिक्षक स्कूल पहुंचते ही नहीं हैं जो आस बनेगा कि मेरा बच्चा पढ़ेगा।
इस बात की जानकारी हमें नहीं मिला था अब जानकारी के अनुसार जांच पड़ताल करते हैं दोषी के विरुद्ध शख्त कारवाई करेंगे।
- शिक्षा विभाग के डीईओ संग्राम सिंह

