पटना हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती में EWS आरक्षण में अनियमितता पर राज्य सरकार और BPSC से जवाब मांगा है. अब अगली सुनवाई इस दिन होगी-
पटना : बिहार की पटना हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती में EWS वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण नहीं देने के मामले में राज्य सरकार और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से जवाब मांगा है. यह आदेश जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने याचिकाकर्ता अभय राज और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया.
'जानबूझकर घटाया गया आरक्षण' : याचिकाकर्ताओं ने BPSC द्वारा जारी विज्ञापन संख्या 22/2024 के तहत शिक्षक पदों के लिए आवेदन किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि EWS के लिए निर्धारित 10% आरक्षण जानबूझकर कम कर दिया गया. कुल 19842 पदों में से सिर्फ 917 पद EWS को दिए गए, जबकि कानून के अनुसार 1984 पद मिलने चाहिए थे.
पदों का प्रावधान : वरीय अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि जब कुल पद 21771 थे, तब EWS को लगभग 2000 पद दिए गए थे. लेकिन 2023 में हाईकोर्ट द्वारा 65% आरक्षण कानून को असंवैधानिक घोषित करने के बाद कुल पद घटकर 19842 रह गए, और EWS को सिर्फ 917 पद दिए गए.
महिलाओं को गलत तरीके से दिया गया आरक्षण : याचिका में यह भी कहा गया है कि महिलाओं को आरक्षण वर्टिकल रूप में दिया गया, जबकि संविधान के अनुसार उन्हें क्षैतिज आरक्षण मिलना चाहिए था. इससे महिला उम्मीदवारों के लिए निर्धारित आरक्षण का स्वरूप असंवैधानिक हो गया है.
अगली सुनवाई 23 जून को होगी : पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और BPSC से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 जून 2025 को निर्धारित की है. कोर्ट का यह आदेश शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और आरक्षण नीति के न्यायिक पालन को लेकर अहम माना जा रहा है.