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अब सिर्फ B.Ed कोर्स के लिए नहीं चलेंगे कॉलेज – जानें नया नियम 2025

अब सिर्फ B.Ed. कोर्स के लिए नहीं चलेंगे कॉलेज

अब बीएड की पढ़ाई केवल बहुविषयक कॉलेजों में ही होगी। इस संबंध में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) ने सभी राज्यों को पत्र लिख कर दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।


एनसीटीई ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार पहले एकल तकनीकी संस्थानों को बहुविषयक उच्च संस्थानों में तब्दील करने का निर्णय लिया है।

सभी राज्यों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि उन्हें 2030 तक अपने सभी बीएड कॉलेजों को बहुविषयक संस्थानों के रूप में विकसित करना होगा। यदि निर्धारित समयावधि में ऐसा नहीं हुआ, तो कॉलेजों की मान्यता रद्द हो सकती है।

अब खुद को बहुविषयक संस्थान के रूप में विकसित करना होगा। इसका मतलब है कि जहां केवल बीएड की पढ़ाई होती है, वहां अन्य समाजिक स्तर और विज्ञान विषयों की पढ़ाई भी अनिवार्य होगी।

फिलहाल पूरे देश में बीएड कॉलेजों की संख्या 3377 के करीब है।

एक ही संस्था के कॉलेज तीन जिलों में अलग-अलग नहीं हो जाएंगे

दिशा-निर्देश में यह भी कहा गया है कि एक ही संस्था के दो से अधिक कॉलेज एक जिले में नहीं चल सकते। यदि संस्था के कॉलेज दूसरे जिले में हैं, तो उन्हें वहीं के बहुविषयक संस्थान में मर्ज करना होगा।

एक कॉलेज में कम से कम 10 विषयों की पढ़ाई होनी चाहिए। दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी बीएड कॉलेज में हर साल कम से कम 50 स्टूडेंट्स का एडमिशन होना चाहिए।

संस्थानों को बदलाव के लिए 2030 तक समय

एनसीटीई ने राज्यों को 2030 तक का समय दिया है ताकि वे अपने बीएड कॉलेजों को बहुविषयक संस्थानों में बदल सकें।

इसके तहत एक ही परिसर में बीएड के साथ-साथ कला, विज्ञान और वाणिज्य वर्ग के अन्य विषयों की पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है।

इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा महाविद्यालयों की गुणवत्ता बढ़ाना और शिक्षकों की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

बीएड कॉलेजों में मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन जरूरी

बीएड कॉलेजों को अब मल्टीडिसिप्लिनरी बनाना जरूरी है।

राज्य के कॉलेजों पर पड़ेगा सीधा असर

राज्य में मौजूद सभी निजी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को एनसीटीई के दिशा-निर्देश के अनुसार अपने कॉलेजों को अपग्रेड करना होगा।

यदि संस्थाएं ऐसा नहीं करती हैं तो उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

यह कॉलेजों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

आपको यह पोस्ट कैसी लगी?

हमें नीचे कमेंट में जरूर बताएं कि NCTE के इस फैसले पर आपकी क्या राय है।

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