बिहार में डोमिसाइल नीति विवाद
बिहार में डोमिसाइल नीति को लेकर लंबे समय से बहस और विवाद चल रहा है। खासकर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में डोमिसाइल नीति को हटाए जाने के बाद से यह मुद्दा और गर्म हो गया है। जब नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की महागठबंधन सरकार सत्ता में थी, तब कई विपक्षी नेता इस नीति को लागू करने की मांग को लेकर मुखर थे। लेकिन अब, जब ये नेता सत्ता में हैं, इस मुद्दे पर उनकी चुप्पी सवाल खड़े करती है। यह दोहरा रवैया बिहार के युवाओं, विशेषकर शिक्षक अभ्यर्थियों, के बीच नाराजगी का कारण बन रहा है। इस लेख में हम इस मुद्दे को विस्तार से समझेंगे और सोशल मीडिया पर उठे कुछ प्रमुख बयानों को शामिल करेंगे, जो इस दोहरे चरित्र को उजागर करते हैं।
डोमिसाइल नीति का मुद्दा: पृष्ठभूमि
बिहार में शिक्षक भर्ती के लिए डोमिसाइल नीति को 2023 में हटा दिया गया था, जिसके बाद बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की शिक्षक नियुक्ति परीक्षा में अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को भी शामिल होने का अवसर मिला। बिहार के तत्कालीन मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत किसी भी नागरिक को उसके जन्म स्थान या निवास के आधार पर अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले की भर्तियों में अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों की संख्या नगण्य थी, और यह नीति संवैधानिक और व्यावहारिक दृष्टि से उचित नहीं थी।
हालांकि, बिहार के शिक्षक अभ्यर्थियों का कहना है कि डोमिसाइल नीति हटने से स्थानीय युवाओं को नौकरियों में नुकसान हुआ है। सोशल मीडिया, खासकर एक्स पर, लाखों अभ्यर्थियों ने इस नीति को फिर से लागू करने की मांग को लेकर अभियान चलाया। उनका तर्क है कि बाहरी अभ्यर्थी फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाकर बिहार की नौकरियों पर कब्जा कर रहे हैं, जिससे स्थानीय बेरोजगारों को पलायन करना पड़ रहा है।
विपक्ष में शोर, सत्ता में चुप्पी
जब नीतीश कुमार और राजद की महागठबंधन सरकार सत्ता में थी (2022 तक), कई नेता जो उस समय विपक्ष में थे, डोमिसाइल नीति को लेकर सरकार पर हमलावर थे। लेकिन अब, जब नीतीश कुमार एनडीए के साथ सत्ता में हैं, इन नेताओं की चुप्पी बिहार के युवाओं के लिए चर्चा का विषय बन गई है।
1. चिराग पासवान (Lok Janshakti Party - Ram Vilas)
"पिछले 4 सालों से शिक्षक बहाली के लिए परेशान शिक्षक अभ्यर्थियों पर डोमिसाइल नीति हटाकर पुरे देश के अभ्यर्थियों पर लागू करना यह बिहार के अभ्यर्थियों को मानसिक प्रताड़ना देने जैसा है, यह बिहारियों के साथ अन्याय है। मुख्यमंत्री @NitishKumar जी के द्वारा उनके निजी स्वार्थ में लिए गए फैसले का मैं और मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) घोर निंदा करती है..."
— चिराग पासवान, 1 जुलाई 2023
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2. उपेंद्र कुशवाहा (Rashtriya Lok Morcha)
"वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षक भर्ती के लिए राज्य से बाहर के विद्यार्थियों के लिए यह कहकर दरवाजा खोल दिया कि गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, संस्कृत, हिन्दी आदि विषयों में बिहार में शिक्षक बनने के योग्य विद्यार्थी नहीं हैं. घोर सुशासन वाली सरकार की यही है उपलब्धि कि 18 वर्षों में अपने राज्य में स्कूल में पढ़ाने लायक पर्याप्त शिक्षक भी नहीं बना पाए. इसे कहते हैं- को बड़ छोट कहत अपराधू"
— ABP Live, 28 जून 2023
3. प्रेम कुमार (BJP)
"डोमिसाइल बिहार के लिए अत्यंत ही जरूरी है इससे बिहारी प्रतिभा को जगह मिलेगी और हम चाहते हैं कि इसे जल्द लागू किया जाए."
4. सम्राट चौधरी (BJP)
"नीतीश कुमार सरकार की शिक्षक भर्ती नीति और डोमिसाइल हटाने के फैसले ने बिहार के स्थानीय अभ्यर्थियों को नुकसान पहुँचाया है।"
— Wikipedia स्रोत
5. विजय कुमार सिन्हा (BJP)
"बिहार के प्रतिभा को दबाने का खेल खेल रहे हैं, बिहार को अपमान किया ही नहीं किया है बल्कि बिहार को शर्मसार किया है. इसके विरोध में सड़क से सदन तक लड़ाई होगी. बिहार सरकार की नीति बिहार के युवाओं के साथ अन्याय कर रही है, और डोमिसाइल हटाना इसका हिस्सा है।"
— विजय कुमार सिन्हा - Punjab Keshri
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6. जीतन राम मांझी (Hindustani Awam Morcha)
"बिहार के पढे लिखे युवा मजदूरी करे दुसरे राज्यों में और बिहारियों के हिस्से की सरकारी नौकरी आप बेच दें “लैंड फॉर जॉब” और “मनी फॉर जॉब” के तहत। “बिहारी नौकरियों पर पहला अधिकार मांगें बिहारी बेरोज़गार” “वोट दें बिहारी,नौकरी पाएं बाहरी” यह नहीं चलेगा। “सूबे में डोमिसाइल नीति लागू हो”"
— जीतन राम मांझी, 27 अक्टूबर 2023
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सोशल मीडिया प्रतिक्रियाएं
बिहार में डोमिसाइल नीति का मुद्दा केवल एक नीतिगत मसला नहीं है, बल्कि यह बिहार के युवाओं की भावनाओं और उनके भविष्य से जुड़ा है। जब विपक्ष में रहते हैं, तो नेता इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हैं, लेकिन सत्ता में आने पर उनकी चुप्पी बिहार के युवाओं के साथ विश्वासघात जैसी लगती है। सोशल मीडिया पर चल रहे अभियान और प्रदर्शन इस बात का सबूत हैं कि बिहार के युवा अब इस दोहरे चरित्र को समझ चुके हैं और वे अपनी मांग को लेकर एकजुट हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस दोहरे रवैये पर सवाल उठाए हैं।
"सर जब सरकार में थे तो एक लफ्ज़ नही बोले बल्कि डोमिसाइल को खत्म कर दिये। जब विपक्ष में रहते हैं तो तब ही आपलोग लिखते है बिहार के युवा को सब बात याद है..."
— @Abdulsubhandbg, 5 जून 2025
"बिहार की नौकरियों पर पहला हक बिहारी छात्र का है.! बिहारियों का हक लूटने नहीं देंगे नीतीश जी.... ये तो डोमिसाइल लागू कीजिए ये कुर्सी खाली कीजिए—🫵 NO DOMICILE NO VOTE 🚫"
— @Ravi_Ranjan940, 4 जून 2025
"मैं माननीय मुख्यमंत्री @NitishKumar जी, से मांग करता हूं कि बिहार में डोमिसाइल नीति जल्द से जल्द लागू करें..."
— @Shoaib_Akhter_7, 5 जून 2025
"पता नहीं बिहार में डोमिसाइल को लेकर @NitishKumar जी को हटाने का कौन मूर्ख सलाह दिया था..."
— @Rahulbihariii, 8 अगस्त 2024
"आज भी हम इस पर कायम हैं और कायम रहेंगे। जिस सरकार में #डोमिसाइल हटाया गया उसमें नीतीश कुमार जी मुख्यमंत्री थे..."
— @ChitranjanGaga1, 18 अगस्त 2024
निष्कर्ष
डोमिसाइल नीति बिहार की राजनीति और बेरोजगारी के मुद्दे का एक अहम हिस्सा है। नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर इस नीति को फिर से लागू करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्ष में रहते हुए इस मुद्दे को उठाने वाले नेताओं की सत्ता में चुप्पी बिहार के युवाओं के बीच नाराजगी का कारण बन रही है। अगर सरकार इस मांग को गंभीरता से नहीं लेती, तो 2025 के विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है। बिहार के युवा अब साफ कह रहे हैं: "डोमिसाइल नहीं, तो वोट नहीं।"
