बिहार में डोमिसाइल आरक्षण की मांग तेज
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एक मुद्दा बहुत तेजी से उभर रहा है. यह मुद्दा सरकारी नौकरी में स्थानीय युवाओं को आरक्षण देने की मांग या डोमिसाइल रिजर्वेशन का है. बिहार में डोमिसाइल को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज होता जा रहा है. बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष छात्र नेता दिलीप कुमार ने 2 जुलाई को पटना में बड़े पैमाने पर महा आंदोलन करने की घोषणा कर दी है.
डोमिसाइल को लेकर पटना में होगा आंदोलन
छात्र नेता दिलीप कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बिहार की सरकारी नौकरियों पर पहला अधिकार बिहारी युवाओं का है और इसके लिए डोमिसाइल नीति लागू करना राज्य सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस मांग को नहीं माना तो आगामी चुनावों में युवा सरकार के खिलाफ वोट करेंगे.
बिहार के युवा सरकारी नौकरी पर निर्भर
पटना में चौथे चरण की शिक्षक बहाली के साथ राज्य के अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र रविशंकर सिंह ने कहा कि जब देश के अधिकांश राज्य सरकारी नौकरियों में स्थानीय आरक्षण लागू कर चुके हैं तो बिहार में भी यह नीति जल्द से जल्द लागू की जानी चाहिए. 2 जुलाई का आंदोलन इस मांग को और मजबूती देगा.
बेरोजगारी संकट और डोमिसाइल की अनिवार्यता
छात्र नेता दिलीप कुमार ने बताया कि बिहार की जनसंख्या देश के कई राज्यों की तुलना में काफी अधिक है, लेकिन यहां उद्योग और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं. ऐसे में सरकारी नौकरियां ही युवाओं के लिए सबसे बड़ा रोजगार स्रोत हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार का आभार जताते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में बड़ी संख्या में सरकारी भर्तियां निकली हैं जिसके लिए राज्य सरकार सराहना की पात्र है. हालांकि दूसरे राज्यों के उम्मीदवार भी बड़ी संख्या में इन भर्तियों में शामिल हो रहे हैं जिससे स्थानीय युवाओं के रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं.
बीपीएससी टीआरई में बाहरी उम्मीदवारों का बढ़ता दखल
छात्र नेता दिलीप ने बताया कि हाल ही में संपन्न बीपीएससी टीआरई (शिक्षक भर्ती परीक्षा) के परिणामों में कुछ विषयों में बिहार से बाहर के उम्मीदवारों का चयन अधिक संख्या में हुआ है, जो बिहारी छात्रों के लिए चिंता का विषय है. उन्होंने मांग की कि आगामी बीपीएससी टीआरई-4, बीएसएससी सीजीएल-4, दारोगा भर्ती और एसटीईटी (STET) की परीक्षाओं में डोमिसाइल नीति को लागू किया जाए.
2 जुलाई को पटना में बड़ा आंदोलन
छात्र नेता दिलीप ने कहा कि इससे पहले 5 जून को भी डोमिसाइल नीति को लेकर पटना में बड़ा छात्र आंदोलन हुआ था, जिसमें हजारों युवाओं ने भाग लिया था. अब 2 जुलाई को एक बड़ा प्रदर्शन होगा, जिसमें बिहार के विभिन्न जिलों से छात्रों के साथ-साथ बेरोजगार युवा भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे.
"अगर सरकार ने मांग को गंभीरता से नहीं लिया तो यह आंदोलन और भी तेज होगा. अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो युवाओं का आक्रोश और बढ़ेगा. अगर सरकार ने इस मांग को नहीं माना तो आगामी चुनावों में युवा सरकार के खिलाफ वोट करेंगे."
- दिलीप कुमार, अध्यक्ष, बिहार स्टूडेंट यूनियन
बिहार की नौकरियों की हकमारी:
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को चाहिए कि वह युवाओं की इस जायज मांग को गंभीरता से ले और बिहारी छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए डोमिसाइल नीति को तुरंत लागू करे. उन्होंने कहा कि बिहार में औद्योगिक माहौल नहीं है ऐसे में उनके जैसे यहां के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी ही एकमात्र रास्ता बचता है. लेकिन डोमिसाइल नहीं लागू होने से बिहार की नौकरियों में दूसरे प्रदेश के छात्र बड़ी संख्या में आ जा रहे हैं और उनकी हकमारी हो रही है.
क्यों जरूरी है बिहार के लिए डोमिसाइल नीति?
दिलीप कुमार ने विस्तार से समझाया कि देश के कई राज्यों में पहले से ही सरकारी नौकरियों में स्थानीय आरक्षण लागू है जिसके कारण बिहार के युवाओं को नौकरी पाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों ने परीक्षा पैटर्न और सिलेबस को इस तरह डिजाइन किया है कि उन राज्यों से संबंधित प्रश्न ज्यादा पूछे जाते हैं, जिससे स्थानीय उम्मीदवारों को फायदा मिलता है.
ये है मांग:
बिहार में प्राथमिक शिक्षक भर्ती में 100% डोमिसाइल आरक्षण लागू किया जाए, क्योंकि छोटे बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देना अत्यंत आवश्यक है. इसके अलावा, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक, पुलिस (दारोगा/सिपाही), बीएसएससी और अन्य सरकारी नौकरियों में कम से कम 90% सीटें स्थानीय उम्मीदवारों के लिए आरक्षित की जानी चाहिए. शेष 10% सीटें मेरिट के आधार पर खुली रखी जा सकती हैं जिसमें बाहरी राज्यों के योग्य उम्मीदवार भी चयनित हो सकें.
क्या है डोमिसाइल ?
डोमिसाइल का मतलब होता है निवास या घर. डोमिसाइल नीति के तहत सिर्फ उसी राज्य के निवासी आवेदन कर सकते हैं और इसकी शर्त्तों को पूरा करने के लिए उस राज्य का वोटर होना जरूरी. वहीं नाबालिग होने पर माता-पिता को उस राज्य का निवासी होना जरूरी है जबकि विवाहित महिलाओं के लिए पति का उस राज्य का निवासी होना जरूरी है. डोमिसाइल के लिए उस राज्य में जमीन, घर या संपत्ति होनी चाहिए और कम से कम 3 साल से उस राज्य में रहने का प्रमाण हो.
2025 के चुनाव में बनेगा बड़ा मुद्दाः
बिहार विधानसभा के चुनाव में अब करीब एक साल का समय बचा है. जाहिर है सियासी दल अभी से चुनावी तैयारियों में जुटे हैं. जातीय जनगणना और आरक्षण को लेकर तलवारें तो पहले से खिंच ही चुकी हैं, डोमिसाइल का मुद्दा भी बिहार के सियासी रणक्षेत्र में बड़ा सियासी मिसाइल बनने जा रहा है.